पौधे लगाने विकास के कई सिध्दांत

नमस्कार दोस्तों मे आपका दोस्त दीपक कुमार और आप देख रहे है  dnateach आज जानेंगे पोधा कैसे लगाए।

               स्थान का चुनाव


फलों की खेती में स्थान का चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। स्थान के चुनाव ध्यान में रखना चाहिए

1.  मिट्टी 

अच्छी जल ---

   निकास वाली भूमि उधान के लिए उपयुक्त होती है। कँकरीली मिट्टी अथवा बुलई मिट्टी मे वृक्षों की बाढ रूक जाती हैं। दोमद मिट्टी उधान के लिए सवोत्तम होती हैं।


                  
पौधे लगाने विकास के कई सिध्दांत
Plant

2.  सिचाई की सुविधा 


-- वृक्षों की सफलता पुर्वक उन्हीं स्थानों पर उगाया जा सकता है, जहाँ सिचाई की सुविधा सुलभ हो। उधान के प्रारंभिक वर्षों में लगभग दो - तीन साल तक पोधों को प्रायः सप्ताह में दो बार जल की आवश्यकता होती हैं , अतः ईन्हें ऐसे स्थान में लगाना चाहिए जो नहर नलकूप अथवा किसी जलाशय के निकट हो ।

3.श्रम की ऊपलब्धता 


कुशल तथा परिश्रमी श्रमिक बाग के लिए अत्यावश्यक होतें है। अतः यह जरूरी है कि बाग ऐसे स्थान पर हो जहाँ श्रमिक सुविधा से मिल सके।


4. स्थिति


 उधान (पोधै) ऐसे स्थानो पर न लगाया जाए जहाँ जंगली जानवरों से हानि की संभावना हो। जैसे की पशु पक्षी से नुकसान न पहुंचना चाहिए, हानि का कारण होतीं हैं।

5. बाजार 


उधान( पोधा ) के जितना ही निकट होगा, फलों को बिक्री के लिए भेजने में उतनी ही सुविधा होगी । अतः पोधों को ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जो बाजार के निकट हो।


6. यातायात के सुविधा 



पोधों को यथाशक्ति किसी सडक़ के किनारे लगाना चाहिए जिससे फलों को सुविधापूर्वक बाजार तक ले जाया जा सके । आम, नींबू , संतरा , केला , आदि ।

                 वृक्षारोपण कि विधियां -  


1. वर्गाकार ( square) इस बिधि में लंबाई तथा चौडाई , अथार्त पंक्ति से पंक्ति व पौधों से पौधों कि दूरी समान होना चाहिए।

2.आयताकार (rectangular) इस विधि में पौधे से पौधे की दुरी तो समान रहतीं हैं परन्तु पंक्ति से पंक्ति की दुरी भिन्न होती है। अतः वर्ग के बजाए इसमें आयात बन जाते हैं।


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